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Monday, 15 October 2018

तवज्जो









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वर्ना मेरी तवज्जो का हक़दार तू भी कहाँ कम था!

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मरहला: झमेला; दर-हक़ीक़त: वास्तव में; तवज्जो: ध्यान; हक़दार: योग्य

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